जिंक की कमी से क्या आप नपुंसक हो सकते हैं?
यह सवाल आजकल बहुत से पुरुषों के मन में उठता है, खासकर जब वे लगातार थकान, कमजोरी, यौन इच्छा में कमी या इरेक्शन संबंधी समस्याओं का सामना करते हैं। जिंक एक महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्व है जो शरीर में कई आवश्यक क्रियाओं को संचालित करता है। हालांकि जिंक की कमी अकेले किसी व्यक्ति को पूरी तरह नपुंसक नहीं बना सकती, लेकिन यह पुरुष यौन स्वास्थ्य को काफी प्रभावित कर सकती है और इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ED) जैसी समस्याओं में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चलता है कि जिंक टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के उत्पादन में प्रमुख भूमिका निभाता है, जो यौन इच्छा, इरेक्शन की क्षमता और शुक्राणु उत्पादन के लिए जरूरी है। जब जिंक का स्तर कम होता है तो टेस्टोस्टेरोन का स्तर गिर सकता है, जिससे यौन इच्छा कम हो जाती है, इरेक्शन कमजोर पड़ सकता है और समग्र यौन प्रदर्शन प्रभावित होता है।
जिंक क्या है और पुरुष स्वास्थ्य में इसकी भूमिका
जिंक शरीर में 300 से अधिक एंजाइम्स की क्रियाओं में शामिल होता है और यह प्रतिरक्षा प्रणाली, घाव भरने, कोशिका निर्माण और हार्मोन संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। पुरुषों के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह टेस्टोस्टेरोन संश्लेषण को सपोर्ट करता है। टेस्टोस्टेरोन पुरुष हार्मोन है जो यौन इच्छा (लिबिडो), मांसपेशियों की मजबूती, हड्डियों की सेहत और शुक्राणु उत्पादन को नियंत्रित करता है। जिंक की कमी से टेस्टोस्टेरोन स्तर में कमी आ सकती है, जो यौन स्वास्थ्य पर सीधा असर डालती है। हाल के अध्ययनों में पाया गया है कि जिंक की कमी से पेनाइल टिश्यू में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है, नाइट्रिक ऑक्साइड का उत्पादन कम होता है और ब्लड फ्लो प्रभावित होता है, जो इरेक्शन के लिए आवश्यक है। उदाहरण के लिए, 2023 के एक अध्ययन में पाया गया कि जिंक ने लेड एक्सपोजर से होने वाली यौन और इरेक्शन समस्याओं को सुधारा, जहां जिंक ने XO/UA-ड्रिवन ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को दबाया और टेस्टोस्टेरोन को बढ़ाया। इसी तरह, HAART (एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी) से प्रभावित चूहों में जिंक ने इरेक्शन एंजाइम्स को बढ़ाया और रेडॉक्स बैलेंस बनाए रखा।
जिंक न केवल टेस्टोस्टेरोन उत्पादन में मदद करता है बल्कि यह शुक्राणु की संरचना में भी मौजूद होता है और स्पर्म की गतिशीलता को प्रभावित करता है। पुरुष शरीर में जिंक की उच्च सांद्रता प्रोस्टेट ग्रंथि और सेमिनल वेसिकल्स में पाई जाती है, जहां यह शुक्राणु को पोषण प्रदान करता है। कमी होने पर ये ग्रंथियां प्रभावित होती हैं, जिससे स्पर्म क्वालिटी गिरती है। वैज्ञानिक रूप से, जिंक टेस्टोस्टेरोन रिसेप्टर्स की एक्टिविटी को भी बढ़ाता है, जिससे हार्मोन का प्रभाव अधिक मजबूत होता है। यदि जिंक की कमी लंबे समय तक बनी रहे तो हाइपोगोनाडिज्म जैसी स्थिति विकसित हो सकती है, जहां टेस्टोस्टेरोन स्तर काफी कम हो जाता है।
जिंक की कमी और इरेक्टाइल डिसफंक्शन का वैज्ञानिक संबंध
नपुंसकता या इरेक्टाइल डिसफंक्शन वह स्थिति है जिसमें पुरुष पर्याप्त इरेक्शन प्राप्त नहीं कर पाता या उसे बनाए रख नहीं पाता। इसमें यौन इच्छा की कमी भी शामिल हो सकती है। जिंक की कमी इस समस्या को बढ़ावा दे सकती है क्योंकि यह टेस्टोस्टेरोन कम करती है, शुक्राणु गुणवत्ता प्रभावित करती है और पेनाइल एंडोथीलियम को नुकसान पहुंचाती है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि ED वाले पुरुषों में जिंक का डाइटरी इनटेक कम होता है। 2022 के एक अध्ययन में ED वाले पुरुषों में ट्रेस मेटल्स जैसे जिंक का सेवन कम पाया गया और उच्च इनटेक से ED की संभावना कम हुई। एक अन्य अध्ययन में जिंक सप्लीमेंटेशन ने लेड-इंड्यूस्ड ED को सुधारा। हालांकि, कुछ शोधों में जिंक कमी टेस्टोस्टेरोन कम करती है लेकिन सीधे ED नहीं। 2023 के एक जापानी अध्ययन में कम सीरम जिंक टेस्टोस्टेरोन से जुड़ा था लेकिन इरेक्शन फंक्शन से नहीं। कुल मिलाकर, जिंक कमी ED का योगदानकर्ता है, खासकर कमी गंभीर होने पर या अन्य कारकों जैसे डायबिटीज, तनाव के साथ।
हाल के वर्षों में 2024-2025 के अध्ययनों से पता चला है कि डायबिटिक ED में जिंक स्तर कम नहीं लेकिन कॉपर/जिंक रेशियो बढ़ा हुआ पाया गया, जो ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से जुड़ा है। एक 2025 अध्ययन में ED वाले मरीजों में जिंक और टेस्टोस्टेरोन के बीच संबंध पाया गया, जहां कमी से इरेक्शन कंट्रोल प्रभावित होता है। जिंक नाइट्रिक ऑक्साइड सिंथेस को सपोर्ट करता है, जो वैस्कुलर फंक्शन के लिए जरूरी है। कमी से एंडोथीलियल डिसफंक्शन बढ़ता है, जो ED का एक प्रमुख पैथोफिजियोलॉजिकल फैक्टर है।
जिंक की कमी के सामान्य और यौन स्वास्थ्य से जुड़े लक्षण
जिंक की कमी के लक्षण धीरे-धीरे प्रकट होते हैं और कई बार अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से मिलते-जुलते होते हैं। सामान्य लक्षणों में लगातार थकान, बार-बार संक्रमण होना, घावों का देर से भरना, बालों का झड़ना, त्वचा पर रैश या एक्ने, स्वाद और गंध की क्षमता में कमी, भूख कम लगना और डायरिया शामिल हैं। यौन स्वास्थ्य से जुड़े लक्षणों में कम यौन इच्छा, कमजोर या अनुपस्थित इरेक्शन, शुक्राणु संख्या में कमी, स्पर्म की गतिशीलता और आकार में गिरावट तथा बांझपन की समस्या प्रमुख हैं। पुरुषों में जिंक कमी से हाइपोगोनाडिज्म (कम टेस्टोस्टेरोन) हो सकता है, जो लिबिडो और इरेक्शन प्रभावित करता है। भारत में यह कमी आम है क्योंकि अधिकांश आहार शाकाहारी होता है, जिसमें फाइटेट्स जिंक के अवशोषण को रोकते हैं। सीमित विविधता वाला भोजन जैसे चावल-दाल-रोटी, अधिक शराब का सेवन, डायबिटीज, पाचन संबंधी विकार और तनाव इस कमी को बढ़ाते हैं।
अन्य लक्षणों में मूड स्विंग्स, डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याएं और इम्यूनिटी कम होना शामिल है। यौन लक्षणों में नाइट टाइम इरेक्शन (नॉक्टर्नल पेनाइल ट्यूमेसेंस) में कमी भी देखी जाती है, जो स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण इंडिकेटर है।
जिंक का शुक्राणु उत्पादन और फर्टिलिटी पर प्रभाव
जिंक शुक्राणु उत्पादन और गुणवत्ता पर गहरा प्रभाव डालता है। यह शुक्राणुओं को ऑक्सीडेटिव डैमेज से बचाता है और उनकी संरचना, गतिशीलता तथा संख्या को बेहतर बनाता है। कई मेटा-एनालिसिस में इनफर्टाइल पुरुषों में जिंक स्तर कम पाया गया और सप्लीमेंटेशन से स्पर्म पैरामीटर्स में सुधार हुआ। जिंक स्पर्म मोटिलिटी, मॉर्फोलॉजी और काउंट बढ़ाता है। कमी से स्पर्म असामान्य हो जाते हैं और फर्टिलिटी प्रभावित होती है। पुरुषों में जिंक कमी से स्पर्म काउंट कम होना और बांझपन की समस्या आम है।
2025 के हालिया मेटा-एनालिसिस में जिंक और फोलिक एसिड जैसे सप्लीमेंट्स ने स्पर्म कंसंट्रेशन बढ़ाया, जबकि सेलेनियम और कोएंजाइम Q10 ने मोटिलिटी सुधारी। जिंक स्पर्म डीएनए इंटेग्रिटी को भी बनाए रखता है। कमी से स्पर्म में डीएनए फ्रैगमेंटेशन बढ़ सकता है, जो फर्टिलिटी को प्रभावित करता है।
जिंक की दैनिक आवश्यकता और भारतीय संदर्भ में स्रोत
वयस्क पुरुषों के लिए ICMR-NIN के अनुसार जिंक की अनुशंसित दैनिक मात्रा लगभग 17 मिलीग्राम है, जबकि महिलाओं के लिए 13.2 मिलीग्राम। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह 11 मिलीग्राम मानी जाती है। संतुलित आहार से यह मात्रा प्राप्त की जा सकती है। शाकाहारी स्रोतों में कद्दू के बीज सबसे समृद्ध हैं, जिनमें 100 ग्राम में 7-10 मिलीग्राम जिंक होता है। अन्य स्रोतों में तिल, चना, मूंगफली, राजमा, मसूर दाल, सोयाबीन, साबुत अनाज जैसे ज्वार-बाजरा और नट्स शामिल हैं। वाटरमेलन सीड्स में भी 10 मिलीग्राम तक जिंक होता है। मांसाहारी स्रोत जैसे मांस, चिकन, मछली और अंडे में जिंक बेहतर अवशोषित होता है। विटामिन C युक्त फलों (नींबू, संतरा) के साथ इनका सेवन अवशोषण बढ़ाता है। भारत में शाकाहारी आहार के कारण जिंक कमी आम है, इसलिए विविधता जरूरी है।
भारतीय भोजन में चना (2.5 mg प्रति कप), दालें (3.7 mg प्रति 100g), मूंगफली (3.5 mg), सोयाबीन (4.2 mg) और कद्दू के बीज जैसे स्रोत आसानी से उपलब्ध हैं। फाइटेट्स को कम करने के लिए भिगोना या फर्मेंटेशन उपयोगी है।
जिंक सप्लीमेंटेशन: फायदे, डोज और सावधानियां
यदि कमी पाई जाती है तो डॉक्टर की सलाह पर जिंक सप्लीमेंट लिया जा सकता है। सामान्यतः 15-30 मिलीग्राम दैनिक डोज उपयोगी होती है, लेकिन कमी या ED में 30-50 मिलीग्राम तक दी जा सकती है। अध्ययनों में 45 मिलीग्राम डोज से ED में सुधार देखा गया। अधिक मात्रा में जिंक लेने से मतली, उल्टी, पेट दर्द, डायरिया और कॉपर की कमी हो सकती है, जो इम्यूनिटी और अन्य समस्याएं पैदा करती है। लंबे समय तक उच्च डोज से शरीर का खनिज संतुलन बिगड़ सकता है। ऊपरी सीमा 40 मिलीग्राम/दिन है (FDA), लेकिन EFSA 25 mg सुझाता है। इसलिए स्वयं सप्लीमेंट न लें, पहले रक्त जांच (सीरम जिंक) करवाएं। डॉक्टर टेस्टोस्टेरोन, स्पर्म एनालिसिस, ब्लड शुगर और थायरॉइड टेस्ट भी सुझाते हैं।
नपुंसकता के अन्य प्रमुख कारण और समग्र दृष्टिकोण
यौन स्वास्थ्य केवल जिंक पर निर्भर नहीं करता। यह कई कारकों का संयोजन है। ED के 80% मामले शारीरिक होते हैं जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, मोटापा, धूम्रपान और शराब। हार्मोन असंतुलन (थायरॉइड, प्रोलैक्टिन) और दवाएं भी कारण हो सकती हैं। मानसिक कारण जैसे तनाव, चिंता, डिप्रेशन, प्रदर्शन का डर और रिलेशनशिप इश्यूज भी महत्वपूर्ण हैं। जिंक कमी इनमें से एक है, लेकिन पूरी समस्या नहीं। पर्याप्त नींद (7-8 घंटे), नियमित व्यायाम (वेट ट्रेनिंग टेस्टोस्टेरोन बढ़ाती है), तनाव प्रबंधन (योग, मेडिटेशन), नशा छोड़ना और संतुलित आहार जरूरी हैं। डायबिटीज या हाई बीपी को नियंत्रित रखना भी महत्वपूर्ण है।
समग्र दृष्टिकोण में जीवनशैली बदलाव सबसे प्रभावी हैं। व्यायाम से टेस्टोस्टेरोन 15-20% तक बढ़ सकता है, जबकि तनाव कम करने से कोर्टिसोल घटता है जो टेस्टोस्टेरोन को दबाता है।
कब और कैसे डॉक्टर से संपर्क करें
यदि तीन महीने से अधिक समय से यौन समस्या बनी हुई हो, सुबह की प्राकृतिक इरेक्शन कम हो गई हो, स्पर्म रिपोर्ट असामान्य हो या कोई गंभीर बीमारी हो तो यूरोलॉजिस्ट या एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से परामर्श लें। विज्ञापनों पर भरोसा कर दवा या सप्लीमेंट न खरीदें। जिंक की कमी को ठीक करने से कई पुरुषों में यौन स्वास्थ्य में सुधार देखा गया है, लेकिन समग्र जीवनशैली बदलाव के बिना पूर्ण लाभ नहीं मिलता। सही जानकारी, जागरूकता और समय पर चिकित्सा सहायता से बेहतर स्वास्थ्य संभव है। यह लेख केवल जानकारी के लिए है, व्यक्तिगत सलाह के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।
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